इंदौरमध्य प्रदेश

सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज, उज्जैन में श्रद्धालुओं के लिए 6,146 बेड का विशाल चिकित्सा नेटवर्क बनेगा

 उज्जैन
 महाकुंभ सिंहस्थ- 2028 में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सेहत की सुरक्षा के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 41 करोड़ रुपये की मेडिकल कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें 6146 बेड का विशाल चिकित्सा नेटवर्क खड़ा किया जाएगा। मेला क्षेत्र में अस्थायी अस्पतालों के निर्माण, अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों और दवाओं का इंतजाम किया जाएगा। लेकिन इसी योजना के दस्तावेज एक बड़ा विरोधाभास भी उजागर करते हैं।

जिले के अस्पतालों में 1077 पद रिक्त हैं। यानी करोड़ों श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बजट और ढांचा तो तैयार है, पर सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता बनी हुई है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, मेला क्षेत्र में त्वरित इलाज देने के लिए 20 बेड वाले 7 जोनल अस्पताल और 6 बेड वाले 22 सेक्टर अस्पताल खड़े किए जाएंगे। इसके अलावा, शहर की बाहरी सीमाओं पर बनने वाले 7 सैटेलाइट टाउन में भी 6-6 बेड के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होंगे। आपातकालीन हालातों से निपटने के लिए कालभैरव, मंगलनाथ, दत्तअखाड़ा, महाकाल और त्रिवेणी जोन में 50 मोबाइल फर्स्ट-एड टीमें 24 घंटे तैनात रहेंगी, जिनमें 350 स्वास्थ्य कर्मी तीन शिफ्टों में अपनी सेवाएं देंगे।

चिंताजनक: जिले के अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ का टोटा
एक तरफ जहां बुनियादी ढांचे को चमकाने की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की भारी कमी सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है। प्रशासनिक दस्तावेजों के आंकड़ों के मुताबिक, उज्जैन जिले में स्वास्थ्य विभाग के कुल 2636 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 1077 पद खाली पड़े हैं। यानी करीब 41 फीसदी स्वास्थ्य ढांचा खाली चल रहा है।

1403 पदों पर अतिरिक्त मानव संसाधन की अस्थायी तैनाती का ''एचआर प्लान''
अस्पतालों में कमी को पाटने के लिए सिंहस्थ के दौरान 1403 पदों पर अतिरिक्त मानव संसाधन की अस्थायी तैनाती का ''एचआर प्लान'' तैयार किया गया है। इसमें 150 जनरल ड्यूटी डाक्टर, 150 नर्सिंग स्टाफ, 129 कंपाउंडर, 129 ड्रेसर और 108 लैब टेक्नीशियन बाहर से बुलाए जाएंगे।

40 करोड़ श्रद्धालुओं का अनुमान
उज्जैन में आयोजित कार्यशाला के दौरान सिंहस्थ 2028 के लिए चल रहे अधोसंरचना विकास कार्यों की जानकारी भी दी गई. अनुमान है कि आगामी सिंहस्थ में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन पहुंच सकते हैं, जबकि लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान करेंगे. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सड़क, पुल, घाट, परिवहन और आवासीय सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर देना शुरू कर दिया है। 

CM ने सुनाया कुंभ से जुड़ा रोचक किस्सा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने छात्र जीवन और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी सिंहस्थ की यादें भी साझा कीं. उन्होंने बताया कि 1980 के दशक में वे स्काउट-गाइड सदस्य के रूप में सिंहस्थ में सेवा दे चुके हैं. वहीं 1992 के सिंहस्थ में वे सिंहस्थ समिति से जुड़े थे. इस दौरान उन्होंने एक रोचक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार कार्यालय के प्रवेश द्वार पर एक बुजुर्ग कर्मचारी ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया था और अंदर जाने से रोक दिया था. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अनुभव ही बड़े आयोजनों को बेहतर बनाने की सीख देते हैं। 

आवागमन और यातायात पर रहेगा विशेष फोकस
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उज्जैन के आसपास सड़क नेटवर्क का बड़ा विस्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि शहर में आने-जाने वाले प्रमुख मार्गों को चौड़ा किया गया है ताकि सिंहस्थ के दौरान यातायात का दबाव संभाला जा सके. आने वाले समय में क्षिप्रा नदी पर 22 नए पुलों का निर्माण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इन परियोजनाओं से श्रद्धालुओं की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुगम होने की उम्मीद है। 

घाट, स्नान और ठहरने की व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव
मुख्यमंत्री ने माना कि सिंहस्थ में सबसे बड़ी चुनौतियों में स्नान व्यवस्था और लाखों श्रद्धालुओं को ठहराना शामिल होता है. उन्होंने कहा कि क्षिप्रा नदी के घाटों को मजबूत और व्यवस्थित बनाया जा रहा है. नदी के प्रवाह और घाटों से जुड़ी पुरानी समस्याओं को दूर करने के लिए भी कार्य किए गए हैं. इसके अलावा धर्मशालाओं, आवासीय परिसरों और ठहरने की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। 

रेलवे और अन्य राज्यों से भी होगा समन्वय
सिंहस्थ के दौरान सबसे अधिक दबाव परिवहन व्यवस्था पर पड़ता है. इसे देखते हुए रेलवे से समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्यों के साथ भी बेहतर तालमेल स्थापित किया जाएगा ताकि लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रूप से हो सके और किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति न बने। 

धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में उभरा उज्जैन
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकाल लोक और अन्य विकास कार्यों के बाद उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो चुका है. धार्मिक पर्यटन से जुड़े शहर अब केवल आस्था के केंद्र नहीं रहे, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं. ऐसे में सिंहस्थ 2028 उज्जैन की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने का अवसर होगा। 

सिंहस्थ 2028 का लक्ष्य
कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य केवल भीड़ प्रबंधन नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना है. सरकार का प्रयास है कि सिंहस्थ 2028 आधुनिक सुविधाओं, बेहतर व्यवस्थाओं और सुचारु प्रबंधन के साथ आयोजित हो. प्रशासन का मानना है कि अधोसंरचना विकास, बेहतर यातायात व्यवस्था और समन्वित तैयारी के जरिए आगामी सिंहस्थ को अब तक के सबसे बड़े और व्यवस्थित आयोजनों में शामिल किया जा सकता है। 

सिंहस्थ की तैयारी के लिए अफसरों के सुझाव अहम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा "बाबा महाकाल की नगरी और आपकी कर्मस्थली, हम सभी सौभाग्यशाली हैं. जन्म मृत्यु हमारे हाथ में नहीं है. कई जन्मों के बाद उज्जैन से जुड़ गए तो मानो कई जन्मों का पुण्य जुड़ गया. यहां मौजूद अलग-अलग पदों पर काम करने वालों का धन्यवाद. पीएम मोदी के नेतृत्व में हम हर चुनौती से लड़ रहे हैं. आज जो भी विकास के काम कर रहे हैं, ये लंबे समय तक रहें, ये शासन की मंशा है। 

उज्जैन के सभी मार्गों का चौड़ीकरण
2016 सिंहस्थ में बाहर से आने के लिए मार्ग कम पड़ रहे थे. आज कोई मार्ग ऐसा नहीं जिसका चौड़ीकरण नहीं हुआ हो. देवताओं के नगर में कोई सिर्फ स्नान करने शिप्रा नदी थोड़ी आएगा. पूरे शहर के तीर्थ स्थलों के दर्शन करेगा. इसलिए सभी मंदिरों का जीर्णोद्धार करने का संकल्प है. वर्ष 2028 सिंहस्थ में सारा इंतजाम सरकारी व्यवस्थाओं का हमारे पास होगा। 

यह भी जानिए

    1 जनवरी 2027 से सिंहस्थ मेडिकल सेल की स्थापना और प्रशासनिक काम शुरू होंगे। जीवन रक्षक दवाओं, हाई-टेक उपकरणों और अस्पताल के फर्नीचर की खरीदी।

    जनवरी – 2028 से मेला क्षेत्र में जोनल, सेक्टर अस्पतालों और अस्थायी डिस्पेंसरियों का निर्माण।

    स्थायी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए सिविल अस्पताल जीवाजीगंज को 20 बेड से 50 बेड के अस्पताल में अपग्रेड किया जा रहा है, जिस पर 17.10 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 

भैरवगढ़ डिस्पेंसरी को भी 6 बेड है वाले शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि समय रहते सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी ताकि सिंहस्थ में आने वाले किसी भी श्रद्धालु को इलाज के लिए भटकना न पड़े।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button