भोपालमध्य प्रदेश

प्रदेश में गौवंश संरक्षण के लिए बजट और नीतियों में बड़े बदलाव : मंत्री पटेल

मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज भोपाल में "गौ सेवा से राष्ट्र निर्माण" विषय पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन

भोपाल
भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान केवल एक पशु का नहीं, बल्कि माता का रहा है। प्रदेश में गोवंश के संरक्षण के लिए बजट और नीतियों में बड़े बदलाव किए गए हैं। जिसके अंतर्गत अब सरकार गोशालाओं के लिए प्रति गाय प्रतिदिन 40 रुपये की राशि प्रदान कर रही है। स्वावलंबी मॉडल गौशालाओं के अंतर्गत सरकार 130 एकड़ जमीन और 5000 गायों के पालन के साथ सीएनजी और जैविक खाद उत्पादन मॉडल पर काम कर रही है। पशुपालन एवं डेयरी राज्‍यमंत्री स्‍वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने यह बात संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।

भोपाल स्‍थ‍ित मानसरोवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के तीनों आयुर्वेदिक महाविद्यालय और विश्व आयुर्वेद परिषद के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को 'गौ-सेवा से राष्ट्र निर्माण' संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश में गौ-संवर्धन एवं संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों और जन प्रतिनिधियों ने युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम के दौरान गौ-संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने पर चर्चा की गई।

राज्‍यमंत्री पटेल ने कहा मध्यप्रदेश सरकार ने अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग का नाम बदलकर गौपालन पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग कर दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित गौवंश के संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक अभिनव योजना तैयार की गई है। इसके तहत लगभग 130 एकड़ भूमि निवेशकों को उपलब्ध कराई जाएगी, जहां न्यूनतम 5 हजार गौमाताओं के साथ बड़े स्तर पर आधुनिक गौशालाएं विकसित की जाएंगी। इस योजना का उद्देश्य गौशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से स्वावलंबी इकाइयों के रूप में विकसित करना है। इसके लिए गौशालाओं में सीएनजी उत्पादन, जैविक खाद निर्माण, दुग्ध उत्पादन, ब्रीडिंग और सोलर ऊर्जा जैसे बहुआयामी कार्य किए जाएंगे। विशेष रूप से गोबर से सीएनजी बनाने और जैविक खाद तैयार करने पर जोर दिया जाएगा, जिससे आय के स्थायी स्रोत विकसित होंगे। राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि 5 हजार गौमाताओं की क्षमता वाली इन गौशालाओं में भविष्य में 15 से 20 हजार तक गौवंश रखने की व्यवस्था की जाएगी। इससे उत्पादन और आय में वृद्धि होगी और गौशालाएं पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकेंगी। प्रदेश के 32 जिलों में इस योजना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि 7 जिलों में टेंडर जारी किए जा चुके हैं। दमोह जिले में इस मॉडल की पहली गौशाला स्थापित की जा रही है। यह मॉडल पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और प्रदेश में आवारा गौवंश की समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में परम गौसेवक गुरुदेव अच्युतानंद, सारस्वत वक्ता वैद्य प्रदीप त्रिपाठी, विश्व आयुर्वेद परिषद् के संरक्षक राम प्रताप सिंह राजपूत, डॉ. संध्या चौकसे, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय, मानसरोवर समूह के आयुर्वेद संचालक डॉ. बाबुल ताम्रकार, मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग सिंह राजपूत, साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन की प्राचार्या डॉ. मनीषा राठी उपस्‍थ‍ित रहीं।

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